चारागाह की भूमि पर अतिक्रमण का आरोप: पटेवा के ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई गुहार, कार्रवाई नहीं होने पर बढ़ा आक्रोश

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रिपोर्ट: सनसनी टाइम्स डेस्क
स्थान: राजनांदगांव / पटेवा

राजनांदगांव जिले के ग्राम पंचायत पटेवा में चारागाह एवं घास भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध भवन निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव की सार्वजनिक उपयोग की चारागाह भूमि पर कब्जा कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जिससे पशुपालकों और ग्रामीणों को भविष्य में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

ग्रामीणों द्वारा इस संबंध में 16 जून को राजनांदगांव कलेक्टर को लिखित शिकायत और ज्ञापन सौंपकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई थी, लेकिन शिकायत के कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

चारागाह भूमि पर निर्माण का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत पटेवा में वर्षों पहले पशुओं के चराई क्षेत्र के रूप में चारागाह भूमि आबंटित की गई थी। पूर्व सरपंचों के कार्यकाल में इस भूमि को सुरक्षित रखा गया था और इसका उपयोग गांव के पशुधन के लिए किया जाता रहा है। लेकिन वर्तमान पंचायत कार्यकाल में इसी भूमि पर अतिक्रमण कर भवन निर्माण किए जाने का आरोप लगाया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने निर्माण कार्य का विरोध किया और संबंधित जिम्मेदार लोगों से जानकारी मांगी, तब इसे शासन के निर्देशों के तहत किया जा रहा कार्य बताया गया। हालांकि ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज या आदेश नहीं दिखाया गया।

गांव में नहीं बची वैकल्पिक चारागाह भूमि

ग्रामीणों ने बताया कि पटेवा गांव में बड़ी संख्या में मवेशी हैं और उनके चराई के लिए यह भूमि अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि चारागाह भूमि पर स्थायी निर्माण हो जाता है तो पशुपालकों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में इस स्थान के अलावा कोई अन्य उपयुक्त चारागाह भूमि उपलब्ध नहीं है।

ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य नहीं रोका गया तो सार्वजनिक उपयोग की यह जमीन पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और भविष्य में गांव के पशुपालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ेगी।

कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापन

ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में मामले की निष्पक्ष जांच कराने, निर्माण कार्य की वैधता की जांच करने तथा यदि भूमि चारागाह के रूप में दर्ज है तो उसे तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की गई है।

ज्ञापन में अवैध निर्माण को हटाने और चारागाह भूमि को पुनः ग्रामीणों एवं पशुपालकों के उपयोग के लिए सुरक्षित करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई है।

ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे ग्रामीणों में असंतोष और नाराजगी बढ़ रही है। कई ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मामले में कार्रवाई नहीं की गई तो वे जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के खिलाफ बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर मनमानी तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं और गांव के सामुदायिक हितों की अनदेखी की जा रही है।

इन ग्रामीणों ने की शिकायत

कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में अवध, संजू, खिलेश्वर साहू, देवेन्द्र कुमार साहू, जालेश्वर, धनराज, छबिल सहित अनेक ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं। इस दौरान धनेश्वर, बहुरसिंह, नरसिंह साहू, निरंजन लाल, हुकुम, एमन कुमार, रमेश, भूखन तथा रमेश साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

प्रशासन से ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—

  • चारागाह भूमि की राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच कराई जाए।
  • निर्माण कार्य की वैधता की जांच की जाए।
  • अवैध अतिक्रमण पाए जाने पर तत्काल हटाया जाए।
  • चारागाह भूमि को संरक्षित कर भविष्य में किसी भी प्रकार के कब्जे पर रोक लगाई जाए।
  • मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब देखने वाली बात होगी कि ग्रामीणों की शिकायत पर जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या गांव की चारागाह भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाता है या नहीं।

(नोट: समाचार ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और सौंपे गए ज्ञापन पर आधारित है। प्रशासन एवं संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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