20 साल से अंधेरे में जिंदगी: अब खून से लिखी प्रधानमंत्री को पुकार, 500 से अधिक ग्रामीणों का अनोखा विरोध

addtext 06 11 02.12.05

उदंती-सीतानदी अभ्यारण्य के गांवों में बिजली संकट पर फूटा जनाक्रोश, ग्रामीणों ने रक्त-पत्र भेजकर लगाई गुहार

गरियाबंद। विकास और डिजिटल युग की दौड़ में देश जहां तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के उदंती-सीतानदी अभ्यारण्य क्षेत्र के कई गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। क्षेत्र के अड़गड़ी गांव में सैकड़ों ग्रामीणों ने अपनी वर्षों पुरानी बिजली समस्या को लेकर एक अनोखा और भावुक विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने अपने खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय बाघ विकास प्राधिकरण (NTCA) के नाम पत्र लिखकर क्षेत्र में बिजली सुविधा उपलब्ध कराने की मांग उठाई।

20 वर्षों से बिजली का इंतजार

ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2006 से वे लगातार अपने गांवों तक बिजली पहुंचाने की मांग कर रहे हैं। पिछले दो दशकों में उन्होंने शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों को हजारों आवेदन, ज्ञापन और मांग पत्र सौंपे हैं। इसके अलावा कई बार धरना-प्रदर्शन और जन आंदोलन भी किए गए, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद आज भी क्षेत्र के कई गांव अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। रात के समय बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा और दैनिक जीवन की सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।

सुशासन तिहार में भी उठी थी मांग

हाल ही में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान भी ग्रामीणों ने अपनी समस्या प्रशासन के समक्ष रखी थी। ग्रामीणों के अनुसार, सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन ने बताया कि मामला केंद्र सरकार स्तर पर लंबित है और राष्ट्रीय बाघ विकास प्राधिकरण की अनुमति से जुड़ा हुआ है।

प्रशासन के इस जवाब के बाद ग्रामीणों ने अपनी आवाज सीधे केंद्र सरकार तक पहुंचाने का निर्णय लिया और रक्त से पत्र लिखने जैसा अनोखा कदम उठाया।

500 से अधिक रक्त-पत्र तैयार

अड़गड़ी गांव में आयोजित इस विशेष अभियान में युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से अपने रक्त से पत्र लिखे, जिनकी संख्या 500 से अधिक बताई जा रही है।

इन पत्रों में क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं, बिजली के अभाव में होने वाली कठिनाइयों तथा विकास कार्यों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव का विस्तार से उल्लेख किया गया है। पत्रों को प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय बाघ विकास प्राधिकरण तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

बिजली के बिना प्रभावित हो रही बुनियादी सुविधाएं

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली नहीं होने के कारण क्षेत्र में कई गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं—

🔹 बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
🔹 स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता।
🔹 पेयजल व्यवस्था बाधित रहती है।
🔹 कृषि और रोजगार के अवसर सीमित हैं।
🔹 मोबाइल नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं का उपयोग कठिन हो जाता है।
🔹 गर्मी और बारिश के मौसम में जीवन और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार, यदि क्षेत्र में बिजली पहुंच जाए तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।

वन क्षेत्र और विकास के बीच संतुलन की मांग

उदंती-सीतानदी अभ्यारण्य जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे वन एवं वन्यजीव संरक्षण के पक्षधर हैं, लेकिन इसके साथ-साथ उन्हें बुनियादी सुविधाओं का अधिकार भी मिलना चाहिए।

उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के बीच संतुलन स्थापित करते हुए बिजली जैसी आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।

अब केंद्र सरकार से उम्मीद

रक्त से लिखे गए इन पत्रों के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय बाघ विकास प्राधिकरण से विशेष हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से लंबित इस समस्या का समाधान अब सर्वोच्च स्तर पर ही संभव है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी यह मार्मिक अपील सरकार तक पहुंचेगी और 20 वर्षों से अंधेरे में जीवन बिता रहे सैकड़ों परिवारों को जल्द बिजली सुविधा मिल सकेगी।


Sansani Times View

“जब वर्षों तक ज्ञापन, आवेदन और प्रदर्शन भी किसी समस्या का समाधान नहीं कर पाते, तब लोग अपनी पीड़ा को असाधारण तरीकों से व्यक्त करने पर मजबूर हो जाते हैं। गरियाबंद के ग्रामीणों का रक्त-पत्र अभियान केवल बिजली की मांग नहीं, बल्कि विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की एक भावनात्मक पुकार है।”

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