ठेलकाडीह महाविद्यालय बना श्रेय की राजनीति का केंद्र
रिपोर्ट: Sansani Times | राजनांदगांव/खैरागढ़
राजनांदगांव जिले के खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ठेलकाडीह में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित संत गुरु घासीदास बाबा महाविद्यालय इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित महाविद्यालय भवन पूरी तरह तैयार है, उसका नामकरण भी हो चुका है, लेकिन अब तक यहां शैक्षणिक गतिविधियां शुरू नहीं हो सकी हैं। ऐसे में क्षेत्र के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और ग्रामीणों के मन में एक ही सवाल उठ रहा है—“जब भवन तैयार है तो पढ़ाई कब शुरू होगी?”
वर्षों की मांग के बाद मिला था महाविद्यालय भवन
जानकारी के अनुसार, ठेलकाडीह एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। क्षेत्र में महाविद्यालय की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। इस मांग को तत्कालीन विधायक भुनेश्वर बघेल ने विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था।
इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने इस परियोजना को बजट में शामिल कर स्वीकृति प्रदान की। प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद करोड़ों रुपये की लागत से महाविद्यालय भवन का निर्माण कार्य शुरू हुआ और निर्धारित समय में इसे पूरा भी कर लिया गया।
सत्ता परिवर्तन के बाद हुआ नामकरण
राज्य में सत्ता परिवर्तन होने के बाद नई सरकार ने इस महाविद्यालय को नई पहचान देने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महाविद्यालय का नाम महान संत और समाज सुधारक संत गुरु घासीदास बाबा के नाम पर रखने की घोषणा की।
नामकरण के बाद यह उम्मीद जगी थी कि जल्द ही महाविद्यालय का लोकार्पण होगा और विद्यार्थियों के लिए कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
भवन तैयार, लेकिन छात्रों को नहीं मिल रहा लाभ
वर्तमान स्थिति यह है कि महाविद्यालय भवन पूरी तरह तैयार है, लेकिन संचालन शुरू नहीं होने के कारण इसका लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारें विकास कार्यों का श्रेय लेने में तो आगे रहती हैं, लेकिन वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंचाने में देरी हो रही है।
क्षेत्र के युवाओं का कहना है कि अगर महाविद्यालय जल्द शुरू हो जाए तो हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी राहत मिलेगी।
श्रेय की राजनीति पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि महाविद्यालय अब विकास की बजाय राजनीतिक श्रेय लेने का माध्यम बनता जा रहा है। एक पक्ष भवन निर्माण को अपनी उपलब्धि बता रहा है तो दूसरा पक्ष नामकरण को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जनता को इस बात से कोई सरोकार नहीं कि श्रेय किसे मिलता है। उनकी प्राथमिकता केवल यह है कि महाविद्यालय जल्द शुरू हो और क्षेत्र के बच्चों का भविष्य संवर सके।
ग्रामीणों में व्यंग्य और नाराजगी
महाविद्यालय शुरू नहीं होने को लेकर ग्रामीणों और युवाओं के बीच तरह-तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं। कुछ लोग इसे आने वाले चुनावों का संभावित मुद्दा बता रहे हैं, तो कुछ व्यंग्यात्मक टिप्पणियां कर रहे हैं।
युवाओं के बीच मजाकिया अंदाज में “कॉकरोच जनता पार्टी” बनाने की चर्चा भी सुनाई दे रही है। उनका कहना है कि जैसे कॉकरोच हर परिस्थिति में जीवित रहता है, वैसे ही यह मुद्दा भी वर्षों से जिंदा बना हुआ है, लेकिन समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
छात्रों के भविष्य से जुड़ा अहम सवाल
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी क्षेत्र के विकास की असली पहचान वहां की शैक्षणिक सुविधाओं से होती है। यदि भवन बनकर तैयार है और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, तो संचालन में हो रही देरी पर संबंधित विभागों को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
क्षेत्र के अभिभावकों का कहना है कि महाविद्यालय के शुरू होने से आसपास के सैकड़ों गांवों के विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। इसलिए सरकार और प्रशासन को जल्द से जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
जनता का सीधा सवाल
आज ठेलकाडीह और आसपास के गांवों में एक ही सवाल गूंज रहा है—
“जब भवन तैयार है, नामकरण हो चुका है और श्रेय लेने वाले भी तैयार हैं, तो आखिर छात्रों का भविष्य संवारने के लिए महाविद्यालय का संचालन कब शुरू होगा?”
अब निगाहें शासन और प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर कब इस प्रतीक्षित महाविद्यालय के दरवाजे विद्यार्थियों के लिए खुलेंगे और कब यहां शिक्षा का दीप प्रज्वलित होगा।
Sansani Times इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है।

🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
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📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
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