“सुशासन तिहार” में आवास की मांग को लेकर भावुक हुए बुजुर्ग आदिवासी दंपत्ति, वायरल वीडियो से मचा बवाल

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गरियाबंद (छत्तीसगढ़) — जिले के माडागांव में आयोजित “सुशासन तिहार” शिविर के दौरान एक बुजुर्ग आदिवासी दंपत्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो में दंपत्ति को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान की मांग करते हुए अधिकारियों के सामने भावुक होते और झुकते देखा जा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कमार जनजाति से संबंधित यह दंपत्ति लंबे समय से पक्के मकान की मांग कर रहा था। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार आवेदन दिए और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाए, लेकिन अब तक समाधान नहीं मिला।

शिविर में सामने आया मामला

सूत्रों के अनुसार, जब “सुशासन तिहार” के तहत माडागांव में शिविर आयोजित किया गया, तब दंपत्ति अपनी समस्या लेकर वहां पहुंचे। बातचीत के दौरान जब उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो वे भावुक हो गए और अधिकारियों के सामने झुक गए। यह दृश्य किसी मौजूद व्यक्ति द्वारा रिकॉर्ड कर लिया गया, जिसके बाद वीडियो तेजी से वायरल हो गया।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि क्या योजनाओं का लाभ पाने के लिए गरीबों को इस तरह अपमानित होना पड़ेगा।

प्रशासन का पक्ष

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संबंधित दंपत्ति का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सर्वे सूची में दर्ज नहीं था।

प्रशासन के अनुसार, वर्ष 2009 से यह परिवार गांव से बाहर रह रहा था, जिसके कारण उनका नाम पात्रता सूची में शामिल नहीं हो पाया। अधिकारियों ने यह भी कहा कि आगामी सर्वे में प्राथमिकता के आधार पर उनका नाम जोड़ा जाएगा और आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

उठ रहे सवाल

इस घटना ने ग्रामीण आवास योजनाओं की प्रक्रिया और सर्वे प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि क्या वास्तविक जरूरतमंद कभी-कभी सूची से छूट जाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के कई परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं और उन्हें योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

मामले के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे “सुशासन” के दावों के विपरीत बताया है। वहीं प्रशासन का कहना है कि नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी की जाती है और यदि किसी का नाम छूट गया है तो उसे दोबारा सर्वे के माध्यम से जोड़ा जाता है।

मामला चर्चा में

गरियाबंद की यह घटना अब राज्यभर में चर्चा का विषय बन गई है। वायरल वीडियो के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और योजनाओं की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।

अब देखना होगा कि संबंधित दंपत्ति को कब तक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ मिल पाता है और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।


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