सेवा, शिक्षा और संस्कार का समावेश = माड़ी धाम

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राजनांदगांव (संवाददाता)।
संस्कारधानी के नाम से प्रसिद्ध राजनांदगांव में स्थित माड़ी धाम आज सेवा, शिक्षा और संस्कार का एक सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। आधुनिक जीवनशैली और डिजिटल युग की तेज रफ्तार के बीच यह केंद्र बच्चों को न केवल शैक्षणिक मार्गदर्शन दे रहा है, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी जोड़ रहा है।

माड़ी धाम में विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले बच्चे नियमित रूप से अध्ययन करते हैं। यहां शिक्षा के साथ-साथ सेवा भावना, अनुशासन, संस्कार और व्यवहारिक ज्ञान पर विशेष जोर दिया जाता है। संस्थान का उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए उन्हें एक जिम्मेदार और संस्कारित नागरिक के रूप में तैयार करना है।

बिना शुल्क, पूर्ण समर्पण

इस केंद्र की सबसे विशेष बात यह है कि यहां किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। बच्चे अपनी स्वेच्छा से यहां आकर शिक्षा और संस्कार ग्रहण करते हैं। यहां वातावरण पूरी तरह सकारात्मक और प्रेरणादायक है, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास और नैतिकता का विकास हो रहा है।

संस्थान में बच्चों को बड़ों का सम्मान, सहयोग की भावना, समाज सेवा, नियमित अनुशासन और भारतीय संस्कृति के महत्व के बारे में विस्तार से बताया जाता है। धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आध्यात्मिक जागरूकता भी विकसित की जाती है।

नियमित गतिविधियां और नैतिक शिक्षा

माड़ी धाम में भजन, पूजा-पाठ, योग, नैतिक शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़ी गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं। इन कार्यक्रमों में बच्चे उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। इससे न केवल उनकी सांस्कृतिक समझ मजबूत होती है, बल्कि मानसिक और शारीरिक विकास भी सुनिश्चित होता है।

संस्थान से जुड़े विद्यार्थियों ने शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। कक्षा 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षाओं में कई छात्रों ने 80 से 85 प्रतिशत तक अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। यह परिणाम इस बात का प्रमाण है कि संस्कार और शिक्षा का संतुलित समन्वय विद्यार्थियों को उत्कृष्ट परिणाम दिला सकता है।

प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का प्रदर्शन

माड़ी धाम से जुड़े कुछ विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम इस प्रकार रहे —

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सतीश साहू (10वीं) — 91.6 प्रतिशत
त्रिवेणी साहू (12वीं) — 73.8 प्रतिशत
श्लोक सोनी (10वीं) — 73.5 प्रतिशत
दक्षा भुजड़े (8वीं) — 73.5 प्रतिशत
दुष्यंत कुमार साहू (10वीं) — 67.33 प्रतिशत
त्रिवेणी निषाद (12वीं) — 62 प्रतिशत

इन उपलब्धियों ने यह साबित किया है कि माड़ी धाम में बच्चों को केवल संस्कार ही नहीं बल्कि शैक्षणिक उत्कृष्टता की दिशा में भी प्रेरित किया जा रहा है।

समाज के लिए प्रेरणादायक पहल

माड़ी धाम से जुड़े लोगों का मानना है कि वर्तमान समय में बच्चों को सही मार्गदर्शन और मजबूत संस्कार देना अत्यंत आवश्यक है। यदि बचपन से ही उनमें सेवा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास किया जाए तो वे भविष्य में समाज और राष्ट्र के लिए आदर्श नागरिक बन सकते हैं।

अभिभावक भी इस पहल से प्रभावित होकर अपने बच्चों को यहां भेजने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। शिक्षा, सेवा और संस्कृति का यह अनूठा संगम राजनांदगांव में नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

माड़ी धाम का यह प्रयास आने वाले समय में समाज निर्माण और सांस्कृतिक जागरूकता का एक मजबूत आधार बनने की ओर अग्रसर है।


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