1% लेबर उपकर, 18% टैक्स फिर भी ‘लेबर लाइसेंस’ की तलवार — खैरागढ़ में ‘हर घर जल’ योजना या ‘हर बिल पर आपत्ति’ मिशन?

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राजनांदगांव/खैरागढ़ | Sansani Times

देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी “हर घर जल” योजना को गांव-गांव तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का सबसे बड़ा अभियान बताया जा रहा है, लेकिन खैरागढ़ जिले में यह योजना अब पानी से ज्यादा “आपत्तियों” में उलझती दिखाई दे रही है।

हालात ऐसे हैं कि कई गांवों में पाइपलाइन बिछ चुकी है, पानी टंकियां तैयार हो चुकी हैं और निर्माण कार्य का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है, लेकिन ठेकेदारों के भुगतान अब भी सरकारी फाइलों में अटके पड़े हैं।

सबसे ज्यादा विवाद अब उस नई आपत्ति को लेकर खड़ा हो गया है, जिसमें रनिंग बिल जारी करने से पहले “लेबर लाइसेंस” मांगा जा रहा है। ठेकेदारों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर स्थायी नहीं होते। कोई मजदूर दो दिन काम करता है, कोई हफ्तेभर, तो कोई बीच में ही काम छोड़ देता है। ऐसे में हर मजदूर का रिकॉर्ड और लाइसेंस तैयार करना व्यवहारिक रूप से बेहद मुश्किल है।


1% लेबर उपकर और 18% टैक्स के बाद भी नई आपत्ति?

ठेकेदारों का कहना है कि शासन पहले ही उनके हर बिल से 1 प्रतिशत लेबर उपकर काटता है। इसके अलावा जीएसटी प्रणाली में 18 प्रतिशत तक टैक्स और श्रमिक मद से संबंधित अन्य कटौतियां भी की जाती हैं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सरकार पहले से श्रमिक मद में राशि काट रही है, तो फिर “लेबर लाइसेंस” को रनिंग बिल रोकने का नया आधार क्यों बनाया जा रहा है?

ठेकेदारों के मुताबिक रनिंग बिल ही वह पैसा होता है, जिससे मजदूरों की मजदूरी, मशीनों का किराया, डीजल और निर्माण सामग्री का खर्च चलता है। लेकिन भुगतान में लगातार देरी होने से अब कई काम प्रभावित होने लगे हैं।


“पहले काम करो, फिर आपत्तियों का पहाड़ चढ़ो”

स्थानीय ठेकेदारों का आरोप है कि काम पूरा करने के बाद भी उन्हें लगातार नई-नई आपत्तियों का सामना करना पड़ रहा है।

उनका कहना है कि —

“पहले काम पूरा करो, फिर फाइल जमा करो, फिर नई आपत्ति सुनो और आखिर में जवाब मिलता है — ‘अभी प्रक्रिया चल रही है।’”

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा परेशानी मजदूरों और ग्रामीणों को हो रही है, क्योंकि भुगतान अटकने से काम की रफ्तार भी धीमी पड़ती जा रही है।


ग्रामीण बोले — ‘पानी कम, आपत्तियां ज्यादा बह रही हैं’

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें न लेबर लाइसेंस समझ आता है, न तकनीकी आपत्तियां और न रंग-कोडिंग।

उन्हें सिर्फ इतना दिख रहा है कि गांव में पाइपलाइन बिछ गई, नल लग गए, लेकिन कई जगहों पर अब तक पानी शुरू नहीं हो पाया।

गांवों में अब लोग तंज कसते हुए कहने लगे हैं —

“यहां पानी कम, आपत्तियां ज्यादा बह रही हैं।”


दूसरे जिलों में अलग व्यवस्था, खैरागढ़ में अलग नियम?

ठेकेदारों का दावा है कि दूसरे जिलों में इस तरह की प्रक्रियाओं को फाइनल बिल के समय पूरा कराया जाता है, ताकि निर्माण कार्य प्रभावित न हो।

लेकिन खैरागढ़ में रनिंग बिल रोककर “लेबर लाइसेंस” को प्राथमिक आपत्ति बनाया जा रहा है। इससे योजना की गति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


अब प्रशासन पर टिकी नजर

जिले में अब लोगों की नजर प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि —

  • क्या नियमों की आड़ में “हर घर जल” योजना की रफ्तार रोकी जा रही है?
  • क्या रनिंग बिल रोककर खुद सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को संकट में डाला जा रहा है?
  • और आखिर इतनी शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो लोगों को डर है कि “हर घर जल” योजना कहीं “हर फाइल कल” बनकर न रह जाए।


अंतिम कटाक्ष

“यहां पाइपलाइन जमीन में गड़ी है…
भुगतान फाइल में पड़ा है…
मजदूर इंतजार में खड़ा है…
और सिस्टम कह रहा है — ‘नई आपत्ति अभी बाकी है!’”

— Sansani Times

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