BSP को बड़ा झटका: जमरुआ प्रोजेक्ट पर SDM कोर्ट का स्टे, ग्रामीणों में जश्न

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सनसनी टाइम्स

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दल्ली राजहरा | सनसनी टाइम्स डेस्क


दल्ली राजहरा से एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM) श्री सुरेश साहू की अदालत ने भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के प्रस्तावित जमरुआ प्रोजेक्ट पर बड़ा फैसला सुनाते हुए ग्राम जमरुआ की भूमि खसरा क्रमांक 79 और 130 पर स्थगन आदेश (स्टे) जारी कर दिया है।

इस फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों और किसानों ने इसे “अन्याय पर न्याय की जीत” बताते हुए अदालत और संघर्ष में शामिल लोगों का आभार व्यक्त किया है।


ग्रामीणों की लड़ाई को मिली बड़ी राहत

जानकारी के अनुसार, BSP द्वारा ग्राम जमरुआ की विवादित भूमि पर परियोजना कार्य की तैयारी की जा रही थी। ग्रामीण लगातार आरोप लगा रहे थे कि उनकी सहमति और पूरी कानूनी प्रक्रिया के बिना जमीन पर कार्य किया जा रहा है।

मामला न्यायालय पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद SDM कोर्ट ने फिलहाल संबंधित भूमि पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

यह आदेश आने के बाद BSP प्रबंधन को बड़ा झटका माना जा रहा है।

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FDLP की कानूनी लड़ाई बनी जीत की वजह

इस पूरे मामले में फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी (FDLP) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवशंकर सिंह गौर ने आंदोलन और रणनीति की कमान संभाली, जबकि प्रदेश अध्यक्ष एवं अधिवक्ता महेंद्र साहू ने न्यायालय में ग्रामीणों का पक्ष मजबूती से रखा।

सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट बिलासपुर के अनुभवी अधिवक्ताओं की टीम ने भी इस मामले में अहम भूमिका निभाई।


हाईकोर्ट के दिग्गज वकीलों ने संभाला मोर्चा

ग्रामीणों की ओर से पैरवी करने वालों में प्रमुख नाम शामिल रहे—

  • अधिवक्ता कुणाल भंसाली
  • अधिवक्ता गोपाल सोनी
  • अधिवक्ता संतोषी सलामे
  • अधिवक्ता शौरभ मिलिंद

इन सभी ने मिलकर BSP के दावों को कानूनी आधार पर चुनौती दी और अदालत के सामने प्रभावी दलीलें पेश कीं।


क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है यह फैसला?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल एक गांव या जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अधिकारों और भूमि अधिग्रहण के मामलों में बड़ा संदेश देता है।

फैसले के प्रमुख असर:

✅ बिना कानूनी प्रक्रिया के परियोजना आगे बढ़ाना मुश्किल होगा
✅ ग्रामीणों के अधिकारों को न्यायिक सुरक्षा मिली
✅ भूमि अधिग्रहण मामलों में यह फैसला मिसाल बन सकता है
✅ मजदूर-किसान एकता को नई ताकत मिली


क्षेत्र में जश्न का माहौल

फैसले के बाद जमरुआ और दल्ली राजहरा क्षेत्र में ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की। कई जगह मिठाइयां बांटी गईं और FDLP नेताओं के स्वागत की तैयारी शुरू हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि उनके भविष्य और अस्तित्व की लड़ाई थी।


क्या बोले क्षेत्रवासी?

“यह फैसला लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत करता है। अब कोई भी हमारी जमीन बिना हमारी सहमति के नहीं ले सकता।” — ग्रामीण


अब आगे क्या?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में BSP इस फैसले को चुनौती दे सकता है। वहीं ग्रामीण संगठनों का कहना है कि वे अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

इस फैसले का असर प्रदेश के अन्य भूमि अधिग्रहण मामलों पर भी पड़ सकता है।


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