राजनांदगांव/ठेलकाडीह | विशेष रिपोर्ट (सनसनी टाइम्स)
राजनांदगांव जिले के ठेलकाडीह और आसपास के गांवों में संचालित क्रेशर खदानें इन दिनों किसी बड़े खतरे से कम नहीं हैं। खनन कार्यों के चलते यहां जमीन के भीतर अत्यधिक गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं, जो अब “मौत के कुएं” में तब्दील होते जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन खतरनाक खदानों के चारों ओर न तो कोई बाउंड्री वॉल है और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा फेंसिंग—जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
खुले गड्ढे – हर पल मंडरा रहा खतरा
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कई खदानों की गहराई इतनी ज्यादा है कि उनमें झांकना भी जान जोखिम में डालने जैसा है। बावजूद इसके ये गड्ढे पूरी तरह खुले पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति या मवेशी इनमें गिर जाए, तो उसका बच पाना लगभग असंभव है।
रात के समय और बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब ये गड्ढे पानी से भर जाते हैं और दिखाई देना बंद हो जाते हैं।
नियमों की अनदेखी – सीधे खोदे जा रहे गहरे गड्ढे
खनन नियमों के अनुसार खदानों को “पचरीनुमा” यानी सीढ़ीनुमा (बेंचिंग सिस्टम) तरीके से खोदना अनिवार्य होता है, ताकि ढलान सुरक्षित रहे और मिट्टी या पत्थर धंसने का खतरा कम हो।
लेकिन ठेलकाडीह क्षेत्र में अधिकांश खदानों में इन नियमों की खुली अनदेखी की जा रही है। सीधे गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं, जिससे किसी भी समय भूस्खलन या हादसे की आशंका बनी हुई है।
पानी से भरी खदानें – दोहरा खतरा
कई खदानों में पानी भरा हुआ है, जबकि नियमानुसार पानी निकासी के लिए उचित ड्रेनेज सिस्टम होना चाहिए। पानी से भरे ये गड्ढे न केवल दुर्घटना का कारण बन सकते हैं, बल्कि पर्यावरण और भूजल स्तर पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।
कानून सख्त, पालन ढीला
देश में खदान संचालन के लिए सख्त कानून लागू हैं, जिनके तहत:
- सुरक्षित ढलान (बेंचिंग सिस्टम)
- बैरिकेडिंग और फेंसिंग
- जल निकासी व्यवस्था
अनिवार्य है। इन नियमों की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
प्रशासन पर सवाल – कार्रवाई कब?
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे लोगों में आक्रोश और भय दोनों बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन खदानों में सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
जरूरी कदम क्या हैं?
- खदानों के चारों ओर तत्काल फेंसिंग और बैरिकेडिंग
- बेंचिंग सिस्टम का पालन सुनिश्चित करना
- पानी निकासी के लिए उचित ड्रेनेज सिस्टम
- नियमित निरीक्षण और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई
बड़ा सवाल
क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?
या फिर समय रहते इन “मौत के कुओं” को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
(रिपोर्ट: संसनी टाइम्स वेब डेस्क | इनपुट: क्षेत्रीय संवाददाता)

🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
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📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
✨ पहचान — बेबाक, तेज़ और सच को जनता तक पहुँचाने वाली पत्रकारिता।



