स्टेट हाईवे पर हादसों का खेल! वर्षों से बदहाल सड़क बनी जानलेवा, गड्ढों में तब्दील मार्ग पर सफर मजबूरी

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मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मानपुर ब्लॉक अंतर्गत कहडबरी से भानुप्रतापपुर मार्ग की बदहाली अब सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल बनती जा रही है। वर्षों से जर्जर पड़ी इस महत्वपूर्ण सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे, उखड़ी सड़क और बदहाल सतह वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बनी हुई है। बारिश के दिनों में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं, जब गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
यह मार्ग आगे उत्तर बस्तर कांकेर जिले से जुड़ता है। कांकेर, धमतरी सहित आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण आवागमन मार्ग है। इसके बावजूद सड़क की हालत देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जिम्मेदार विभाग इस समस्या को लेकर कब गंभीर होगा?
गड्ढों में तब्दील सड़क, हर सफर बन रहा जोखिम
कहडबरी से भानुप्रतापपुर मार्ग पर कई जगह सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है। बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों की मुश्किल बढ़ा रहे हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश के दौरान सड़क पर बने गड्ढों में पानी भर जाता है। ऐसे में वाहन चालक यह समझ नहीं पाते कि पानी के नीचे सड़क कितनी गहरी है। अचानक गड्ढे में पहिया जाने से वाहन अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है।
रात के समय खतरा और बढ़ जाता है। पर्याप्त दृश्यता नहीं होने के कारण गड्ढे नजर नहीं आते और वाहन चालक अचानक खराब सड़क का सामना करते हैं।
दुर्घटनाओं के बावजूद स्थायी समाधान कब?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर खराब सड़क के कारण पहले भी दुर्घटनाएं होने की बात सामने आती रही है। इसके बावजूद सड़क की स्थायी मरम्मत और आवश्यक निर्माण कार्य को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
लोगों का आरोप है कि वर्षों से सड़क की समस्या बनी हुई है और समय-समय पर मरम्मत अथवा सुधार की बातें होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
अब सवाल यह है कि आखिर कब तक ग्रामीण और वाहन चालक इस बदहाल सड़क पर जोखिम लेकर सफर करते रहेंगे?
एक तरफ गड्ढे, दूसरी तरफ बेहतर सड़क… सवालों के घेरे में व्यवस्था
सबसे बड़ा सवाल उस हिस्से को लेकर भी उठ रहा है जहां मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की सीमा से आगे कांकेर की ओर सड़क की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर नजर आती है।
स्थानीय लोगों की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे सवाल उठा रहे हैं—
क्या बेहतर सड़क बनाना सिर्फ दूसरे हिस्सों के लिए संभव है?
अगर एक ही आवागमन क्षेत्र में सड़क का रखरखाव हो सकता है, तो वर्षों से बदहाल हिस्से की सुध क्यों नहीं ली जा रही?
यह स्थिति प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
क्या किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?
सबसे गंभीर सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
किसी सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा सिर्फ कागजी रिपोर्ट से नहीं, बल्कि मौके पर जाकर लगाया जा सकता है। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग के अधिकारी तत्काल मौके का निरीक्षण करें और सड़क की वास्तविक स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई करें।
लोगों का कहना है कि यदि सड़क की मरम्मत में और देरी हुई तो लगातार बढ़ते जोखिम को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
जनता का दो टूक सवाल—कागजों में नहीं, जमीन पर दिखे विकास
सरकार और प्रशासन विकास कार्यों को लेकर लगातार दावे करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में अगर एक महत्वपूर्ण मार्ग वर्षों से गड्ढों में तब्दील हो, तो उन दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों की मांग साफ है—
अब आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए।
कागजों में विकास नहीं, जमीन पर सुरक्षित सड़क चाहिए।
मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।
कहडबरी से भानुप्रतापपुर मार्ग की बदहाली अब सिर्फ सड़क की समस्या नहीं रह गई है। यह सड़क सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और विकास के दावों की जमीनी हकीकत से जुड़ा सवाल बन चुका है।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग इस रिपोर्ट के बाद सड़क की सुध लेता है या फिर ग्रामीणों और राहगीरों को इसी तरह गड्ढों के बीच सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
जिम्मेदार विभाग से सवाल है—आखिर इस सड़क की मरम्मत कब होगी? और क्या किसी बड़े हादसे से पहले प्रशासन की नींद खुलेगी?

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