छत्तीसगढ़ में नकली खाद-बीज के कथित सिंडिकेट पर बड़ा सवाल, ₹100 करोड़ से ज्यादा की कथित वसूली की जांच की मांग

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किसानों के खाद-बीज कारोबार से लेकर अधिकारियों की भूमिका तक जांच की मांग, राष्ट्रपति-राज्यपाल और केंद्रीय एजेंसियों को भेजी शिकायत

रायपुर – नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में किसानों को उपलब्ध कराए जाने वाले खाद, बीज, कीटनाशक और अन्य कृषि आदानों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में नकली या अमानक कृषि सामग्री के कथित संगठित कारोबार, किसानों से धोखाधड़ी और कार्रवाई के नाम पर कथित अवैध वसूली के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

भारतीय किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने इस संबंध में राष्ट्रपति, राज्यपाल और केंद्रीय जांच एजेंसियों को शिकायत भेजी है। शिकायत में दावा किया गया है कि मामला किसी एक दुकान या व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता और संभावित बहु-जिला नेटवर्क की जांच जरूरी है।

₹100 करोड़ से ज्यादा की कथित वसूली का दावा

शिकायत में कृषि आदान कारोबार से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई के नाम पर ₹100 करोड़ से अधिक की कथित वसूली का दावा किया गया है। हालांकि शिकायतकर्ता ने खुद इसे अंतिम अथवा प्रमाणित आंकड़ा नहीं बताया है।

वास्तविक राशि का पता लगाने के लिए बैंक खातों, डिजिटल भुगतान, आयकर विवरण, GST रिकॉर्ड, जब्ती पंचनामों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

कृषि विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

शिकायत में किसी अधिकारी या व्यक्ति को पहले से दोषी घोषित किए बिना तत्कालीन और वर्तमान संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।

इसमें कृषि मंत्री, मुख्य सचिव, कृषि सचिव, संचालक कृषि, उपसंचालक कृषि, जिला कृषि अधिकारी, निरीक्षक और लाइसेंसिंग अधिकारियों समेत उन सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग है, जिनकी जानकारी, लापरवाही, आदेश या कार्रवाई से जुड़े तथ्य जांच में सामने आ सकते हैं।

संपत्ति से लेकर मनी-ट्रेल तक खंगालने की मांग

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में भ्रष्टाचार या अवैध आर्थिक लाभ का प्रथमदृष्टया आधार मिलता है तो संबंधित अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की चल-अचल संपत्ति, बैंक खाते, लॉकर, कंपनियों एवं फर्मों में हिस्सेदारी, जमीन, भवन, वाहन और निवेश की भी जांच की जाए।

साथ ही संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और कथित अवैध धन के स्रोत की जांच कर मनी-ट्रेल सामने लाने की मांग की गई है। शिकायत में वैधानिक शर्तें पूरी होने की स्थिति में PMLA के तहत ED जांच और आवश्यक प्रक्रिया के अधीन CBI जांच की मांग भी रखी गई है।

नकली खाद-बीज की होगी वैज्ञानिक जांच की मांग

शिकायत में प्रदेशभर में संदिग्ध कृषि आदानों के नमूने लेकर उन्हें मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच कराने की मांग की गई है।

इसके साथ ही—

  • स्टॉक और बिक्री रजिस्टर की जांच
  • बिल और GST रिकॉर्ड का मिलान
  • गोदामों और परिवहन की जांच
  • पुराने नमूनों और जब्ती मामलों की समीक्षा
  • लाइसेंस और अभियोजन संबंधी रिकॉर्ड की जांच

करने की मांग की गई है।

किसानों को कितना नुकसान? जिला-वार आकलन की मांग

शिकायत में यह भी मांग की गई है कि यदि नकली या अमानक कृषि आदानों के इस्तेमाल से किसानों को नुकसान हुआ है तो उसका जिला-वार वैज्ञानिक आकलन कराया जाए।

यदि जांच में किसानों को आर्थिक नुकसान प्रमाणित होता है तो दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं से कानून के अनुसार क्षतिपूर्ति वसूलने की मांग की गई है। सरकारी राजस्व, सब्सिडी या सार्वजनिक धन को नुकसान होने की स्थिति में उसकी भी गणना और रिकवरी की मांग रखी गई है।

“किसी निर्दोष को बदनाम करना उद्देश्य नहीं”

शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि किसी अधिकारी, कर्मचारी, कंपनी या व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना उद्देश्य नहीं है। शिकायत में कहा गया है कि आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के जरिए वास्तविकता सामने आनी चाहिए।

यदि जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो उसे स्पष्ट रूप से निर्दोष बताया जाए—यह मांग भी शिकायत में शामिल है।

जांच हुई तो खुल सकता है खाद-बीज कारोबार का पूरा नेटवर्क

इस शिकायत की सबसे अहम मांग यही है कि जांच केवल किसी एक दुकान या विक्रेता तक सीमित न रहे, बल्कि निर्माता, वितरक, विक्रेता, लाइसेंसिंग व्यवस्था, अधिकारियों की भूमिका, वित्तीय लेन-देन और किसानों को हुए संभावित नुकसान तक पूरी कड़ी को जांच के दायरे में लाया जाए।

अब देखना होगा कि शिकायत पर संबंधित प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं और कथित ₹100 करोड़ से अधिक की वसूली तथा नकली कृषि आदानों के नेटवर्क से जुड़े आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंचती है।

महत्वपूर्ण नोट: ₹100 करोड़ से अधिक की कथित वसूली, नकली कृषि आदानों के संगठित नेटवर्क और अधिकारियों की भूमिका से संबंधित सभी बातें शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। इन्हें स्वतंत्र जांच, सक्षम प्राधिकारी अथवा न्यायालय के निष्कर्ष के बाद ही प्रमाणित तथ्य माना जा सकता है।

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