नकटी गांव बुलडोजर कार्रवाई के बाद बढ़ा जनआक्रोश, मनीष टोडर का अनिश्चितकालीन अनशन जारी; ग्रामीणों ने उठाए पुनर्वास और संवैधानिक अधिकारों के सवाल

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रायपुर _जिले के ग्राम नकटी में हाल ही में हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और असंतोष लगातार बढ़ रहा है। कार्रवाई से प्रभावित होने का दावा करने वाले परिवारों के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता मनीष टोडर पिछले चार-पांच दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवारों को न्याय, पुनर्वास और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना कार्रवाई की गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि बुलडोजर कार्रवाई के दौरान कई परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हुए। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित मकान भी कार्रवाई की जद में आए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और प्रशासन का विस्तृत पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने आना बाकी है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
अनशनकारियों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं—
बुलडोजर कार्रवाई की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच।
प्रभावित परिवारों का सर्वे कर पुनर्वास और उचित मुआवजा।
कार्रवाई के दौरान अपनाई गई प्रशासनिक प्रक्रिया की जांच।
लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई।
संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत संपत्ति संबंधी अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करना।
संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा
आंदोलनकारियों का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 300A के अनुसार किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से केवल विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के तहत ही वंचित किया जा सकता है। उनका आरोप है कि यदि पर्याप्त नोटिस, सुनवाई का अवसर और वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्रवाई हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
हालांकि, यह तय करना कि कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, संबंधित दस्तावेजों, न्यायालय के आदेशों और सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही संभव होगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर भी सवाल
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यदि प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों के मकानों पर भी कार्रवाई हुई है, तो प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित आवासों की कानूनी स्थिति क्या थी और कार्रवाई किस आधार पर की गई।
प्रशासन से जवाब मांग रहे ग्रामीण
ग्रामीणों ने प्रशासन से कई सवाल पूछे हैं—
बुलडोजर कार्रवाई का आदेश किस अधिकारी ने दिया?
कार्रवाई किस कानून और आदेश के तहत की गई?
प्रभावित परिवारों को कितने दिन पहले नोटिस दिया गया?
क्या उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिला?
क्या पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था की गई?
राजनीतिक और अन्य आरोप
आंदोलन के दौरान कुछ लोगों ने कार्रवाई को राजनीतिक कारणों से प्रेरित बताया है। वहीं कुछ प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई के दौरान मवेशियों को नुकसान पहुंचने का भी आरोप लगाया है। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है और संबंधित पक्षों का जवाब आना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला
आंदोलनकारी सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्देशों का भी उल्लेख कर रहे हैं, जिनमें प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कानूनसम्मत प्रक्रिया, पर्याप्त नोटिस और निष्पक्ष सुनवाई पर जोर दिया गया है। हालांकि, किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी की जांच के आधार पर ही तय होता है।
मनीष टोडर का बयान
अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता मनीष टोडर ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और प्रभावित लोगों के पुनर्वास की मांग दोहराई।
फिलहाल, नकटी गांव में मनीष टोडर का अनिश्चितकालीन अनशन जारी है। ग्रामीण प्रशासन से पारदर्शी जांच, स्पष्ट जवाब और न्यायपूर्ण समाधान की मांग कर रहे हैं। वहीं, इस मामले में प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

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