12 घंटे की बारिश से जिला अस्पताल के बाहर घुटनों तक पानी, एक्स-रे और सीटी स्कैन कक्ष भी हुए प्रभावित
राजनांदगांव। मानसून की पहली तेज बारिश ने नगर निगम के प्री-मानसून तैयारियों और नालों की सफाई के दावों की हकीकत सामने ला दी। महज करीब 12 घंटे की लगातार बारिश के बाद शहर के कई नाले उफान पर आ गए, जिससे सड़कों पर पानी भर गया और कई निचली बस्तियों में बारिश का पानी लोगों के घरों तक पहुंच गया।
बारिश के दौरान हर साल सुर्खियों में रहने वाला शासकीय जिला अस्पताल इस बार बड़े स्तर पर जलभराव से बच गया, लेकिन अस्पताल परिसर और बाहरी क्षेत्र में जलनिकासी व्यवस्था की खामियां एक बार फिर उजागर हो गईं। अस्पताल के बाहर घुटनों तक पानी भर जाने से मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अस्पताल परिसर का बड़ा हिस्सा तालाब जैसा नजर आया, जबकि अस्पताल कॉलोनी में भी घुटनों तक पानी जमा हो गया।
लाखों की लागत से हुए निर्माण का दिखा असर
जानकारी के अनुसार, हाल ही में शासन द्वारा लाखों रुपये की लागत से जिला अस्पताल के कुछ हिस्सों का लेवल ऊंचा किया गया था। इसका सकारात्मक असर इस बार देखने को मिला। पूर्व वर्षों में जहां बारिश के दौरान अस्पताल के वार्ड, मेजर ऑपरेशन थिएटर, माइनर ऑपरेशन थिएटर, एक्स-रे कक्ष, सीटी स्कैन कक्ष सहित कई महत्वपूर्ण हिस्से पूरी तरह जलमग्न हो जाते थे, वहीं इस बार अधिकांश प्रमुख भवन सुरक्षित रहे।
हालांकि, जिन हिस्सों का स्तर ऊंचा नहीं किया गया था, वहां अब भी पानी भर गया। विशेष रूप से एक्स-रे और सीटी स्कैन कक्ष जलभराव से प्रभावित हुए, जिससे मरीजों को जांच कराने में असुविधा का सामना करना पड़ा।
नालों की सफाई पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल के बाहरी नालों की समय पर और नियमित सफाई नहीं होने के कारण बारिश का पानी निकासी नहीं हो सका। परिणामस्वरूप पूरा अस्पताल परिसर टापू में तब्दील हो गया। नागरिकों का कहना है कि यदि प्री-मानसून अभियान के तहत नालों की प्रभावी सफाई की गई होती, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।
निचली बस्तियों में भी घुसा पानी
बारिश का असर केवल अस्पताल परिसर तक सीमित नहीं रहा। शहर के कई निचले इलाकों में नालों का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों और रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच गया। कई घरों में पानी घुसने से लोगों को घरेलू सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। जगह-जगह जलभराव के कारण आवागमन भी प्रभावित रहा।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने नगर निगम से अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्रों की जलनिकासी व्यवस्था को स्थायी रूप से सुधारने की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान एक जैसी स्थिति बनना यह दर्शाता है कि अस्थायी उपायों की बजाय दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार
इस संबंध में नगर निगम और जिला अस्पताल प्रबंधन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। यदि संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
(नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी और प्रत्यक्ष स्थिति के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर समाचार को अद्यतन किया जाएगा।)

🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
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📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
✨ पहचान — बेबाक, तेज़ और सच को जनता तक पहुँचाने वाली पत्रकारिता।



