22 साल तक नहीं बना पुल, तो मुर्गा बेचने वाले लोचन चक्रधारी ने खुद खर्च किए 12 लाख रुपये, बदल दी 35 परिवारों की जिंदगी

addtext 06 24 06.14.41

मैनपुर/गरियाबंद। सरकारी योजनाओं और वर्षों के आश्वासनों के बावजूद जब 22 साल तक पुल नहीं बन सका, तब एक साधारण मुर्गा विक्रेता ने अपनी मेहनत की कमाई और कर्ज के सहारे वह कर दिखाया जो पूरा सरकारी तंत्र नहीं कर पाया। गरियाबंद जिले के मैनपुर निवासी लोचन चक्रधारी ने लगभग 12 लाख रुपये खर्च कर फुलझर नाला पर पुल का निर्माण करवा दिया, जिससे करीब 35 परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

दरअसल मैनपुर मुख्यालय के एक मोहल्ले के लोग वर्षों से फुलझर नाला पार करने की समस्या से जूझ रहे थे। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खतरनाक हो जाती थी। स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सिंचाई विभाग के जर्जर स्टॉप डेम के सहारे आवाजाही करनी पड़ती थी। कई बार दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती थी।

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 22 वर्षों से पुल निर्माण की मांग लगातार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने रखी जाती रही। ग्राम सभाओं से लेकर विभिन्न सरकारी मंचों तक इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। पुल निर्माण का सपना कभी हकीकत में नहीं बदल पाया।

इसी बीच स्थानीय निवासी और मुर्गा कटिंग सेंटर संचालक लोचन चक्रधारी ने इस समस्या का समाधान स्वयं करने का निर्णय लिया। रोजाना इसी रास्ते से गुजरने वाले लोचन ने लोगों की परेशानी को करीब से देखा था। जब उन्हें लगा कि सरकारी स्तर पर समस्या का समाधान संभव नहीं हो पा रहा है, तब उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी दांव पर लगाने का फैसला किया।

करीब एक माह पहले शुरू हुए निर्माण कार्य को अब पूरा कर लिया गया है। पुल निर्माण में लगभग 12 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसमें लोचन चक्रधारी की वर्षों की बचत के अलावा परिचितों और रिश्तेदारों से लिया गया कर्ज भी शामिल है।

पुल बनने के बाद अब मोहल्ले के लोगों की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित हो गई है। स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर नाला पार नहीं करना पड़ रहा है और ग्रामीणों को भी काफी राहत मिली है। स्थानीय लोग लोचन चक्रधारी की इस पहल को जनसेवा का अनूठा उदाहरण बताते हुए उनकी सराहना कर रहे हैं।

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पुल के लिए ग्रामीण 22 वर्षों तक गुहार लगाते रहे, वह पुल आखिरकार एक आम नागरिक ने अपने निजी संसाधनों और कर्ज के सहारे बनवा दिया।

लोचन चक्रधारी की यह पहल आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे समाज के प्रति जिम्मेदारी और जनहित के लिए समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण मान रहे हैं।

मुख्य बिंदु

  • फुलझर नाला पर 22 वर्षों से पुल की मांग लंबित थी।
  • करीब 35 परिवारों को आवागमन में होती थी परेशानी।
  • मुर्गा विक्रेता लोचन चक्रधारी ने स्वयं कराया पुल निर्माण।
  • पुल निर्माण में खर्च हुए लगभग 12 लाख रुपये।
  • बचत के साथ कर्ज लेकर पूरा कराया निर्माण कार्य।
  • क्षेत्रभर में हो रही पहल की सराहना।

Sansani Times

Advertisement
Advertisement

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top