मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर 45 गांवों के आदिवासी ग्रामीणों ने किया कलेक्ट्रेट घेराव

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धमतरी | सूरज साहू

धमतरी जिले के सिहावा विधानसभा क्षेत्र के लगभग 45 गांवों के हजारों आदिवासी ग्रामीण सोमवार को अपनी वर्षों पुरानी मूलभूत समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतर आए। किसान संघर्ष समिति एवं जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीणों ने धमतरी कलेक्ट्रेट का घेराव कर शासन-प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के 75 वर्षों बाद भी उनके गांव सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कई बार मांग उठाने और ज्ञापन सौंपने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।


प्रशासन की रोकथाम के बावजूद कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारी

ग्रामीणों के आंदोलन को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कई स्थानों पर चेक पोस्ट बनाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुंचने में सफल रहे।

हजारों ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के बाहर धरना-प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। यह प्रदर्शन करीब छह घंटे तक जारी रहा।


टाइगर रिजर्व क्षेत्र में फंसे विकास कार्य

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके गांव उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। यहां विकास कार्यों की स्वीकृति मिलने के बावजूद वन क्षेत्र से जुड़ी प्रक्रियाओं के कारण अधिकांश योजनाएं अधूरी रह जाती हैं।

ग्रामीणों के अनुसार कई गांवों में आज भी पक्की सड़क नहीं है। बारिश के दिनों में संपर्क मार्ग टूट जाने से गांव मुख्यालय से कट जाते हैं, जिससे मरीजों और विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।


बारिश में बढ़ जाती हैं मुश्किलें

ग्रामीणों ने बताया कि पुल-पुलिया और सड़क के अभाव में बरसात के दौरान हालात बेहद गंभीर हो जाते हैं। गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में घंटों लग जाते हैं और कई बार स्थिति जानलेवा बन जाती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से समस्याओं को लेकर प्रशासन के समक्ष गुहार लगाई जा रही है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन ही मिलता रहा है।


कलेक्टर ने सुनी ग्रामीणों की मांगें

आंदोलन के दौरान बढ़ते दबाव को देखते हुए जिला कलेक्टर को स्वयं प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुननी पड़ीं। प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच लंबी चर्चा हुई।

करीब छह घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनी। जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया कि मांगों पर गंभीरता से विचार कर चरणबद्ध तरीके से समाधान की दिशा में कार्य किया जाएगा।


आश्वासन पर पूरी तरह भरोसा नहीं

हालांकि आंदोलन समाप्त होने के बाद भी ग्रामीण प्रशासन के आश्वासन से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आए। उनका कहना है कि जिन समस्याओं का समाधान दशकों में नहीं हो पाया, उन्हें कुछ महीनों में पूरा कर पाना आसान नहीं होगा।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मांगों पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।


वर्षों की उपेक्षा के खिलाफ उठी आवाज

सिहावा क्षेत्र के हजारों आदिवासी ग्रामीणों का यह प्रदर्शन केवल सड़क, बिजली और पानी की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वर्षों से चली आ रही उपेक्षा और विकास से दूरी के खिलाफ एक बड़ा जनआंदोलन बनकर उभरा है।

अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि वर्षों से लंबित मांगों पर जमीनी स्तर पर कब तक काम शुरू होता है और 45 गांवों के लोगों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ कब तक मिल पाता है।

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