तीन-तीन बार मुख्यमंत्री देने वाला क्षेत्र, फिर भी बरामदे में पढ़ने को मजबूर बच्चे

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राजनांदगांव के सरकारी स्कूल की बदहाल तस्वीर ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल

राजनांदगांव | सन्सनी टाइम्स

प्रदेश सरकार जहां शिक्षा सुधार, स्मार्ट क्लास, गुणवत्ता शिक्षा और स्कूल प्रवेश उत्सव जैसे अभियानों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के दावे कर रही है, वहीं राजनांदगांव शहर के एक सरकारी स्कूल की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। शहर के मध्य स्थित शासकीय डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र प्राथमिक शाला में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत ऐसी परिस्थितियों में हुई है, जहां कई बच्चों को कक्षा के बजाय बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह विद्यालय उस विधानसभा क्षेत्र में स्थित है जिसने प्रदेश को एक ही नेता को तीन-तीन बार मुख्यमंत्री के रूप में चुना। राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस क्षेत्र में शिक्षा की ऐसी तस्वीर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी और चिंता दोनों दिखाई दे रही है।

एक कमरे में कई कक्षाएं, बरामदे में चल रही पढ़ाई

मिली जानकारी के अनुसार विद्यालय में पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं के लिए पर्याप्त कमरों की व्यवस्था नहीं है। हालात ऐसे हैं कि एक ही कक्ष में कई कक्षाओं के विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। वहीं बड़ी संख्या में बच्चों को स्कूल के बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।

गर्मी, उमस और बरसात के मौसम में बरामदे में बैठकर पढ़ाई करना बच्चों के लिए कठिन साबित हो सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि उनका स्वास्थ्य भी जोखिम में पड़ सकता है।

बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव

विद्यालय में केवल कमरों की कमी ही समस्या नहीं है। जानकारी के अनुसार यहां स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है और बच्चे हैंडपंप के भरोसे हैं। पर्याप्त शौचालयों का अभाव भी देखने को मिला। कई स्थानों पर पंखे और अन्य आवश्यक संसाधन भी पर्याप्त नहीं हैं।

बताया जा रहा है कि कुछ विद्यार्थियों को पुराने गणवेश और पुरानी पाठ्यपुस्तकों के साथ पढ़ाई करनी पड़ रही है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों और जमीनी वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है।

प्रवेश उत्सव में स्वागत, लेकिन समस्याओं पर नहीं हुआ समाधान

नए शिक्षा सत्र के पहले दिन प्रदेशभर में स्कूल प्रवेश उत्सव मनाया गया। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने कई स्कूलों में पहुंचकर बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया, मिठाइयां वितरित कीं और शिक्षा के महत्व पर भाषण दिए।

लेकिन राजनांदगांव के इस विद्यालय में बच्चों की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी रहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर कार्यक्रम और आयोजन तो किए जा रहे हैं, लेकिन स्कूलों की वास्तविक जरूरतों और सुविधाओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

शिकायत के बाद पूर्व पार्षद पहुंचे स्कूल

अभिभावकों द्वारा लगातार शिकायत किए जाने के बाद पूर्व पार्षद ऋषि शास्त्री विद्यालय पहुंचे और वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कक्षाओं की कमी, बरामदे में संचालित हो रही पढ़ाई, पेयजल व्यवस्था की समस्या तथा अन्य बुनियादी कमियों को देखा।

इसके बाद उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को पूरे मामले से अवगत कराते हुए तत्काल आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने और बच्चों के लिए पर्याप्त कक्ष तथा मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

शहर के स्कूल की यह स्थिति तो गांवों का क्या हाल?

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि शहर के बीचों-बीच स्थित सरकारी विद्यालय में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, तो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में मौजूद व्यापक चुनौतियों और संसाधनों की कमी की ओर भी संकेत करता है।

जवाब मांगते सवाल

  • क्या शिक्षा केवल उत्सव, भाषण और प्रचार तक सीमित होकर रह गई है?
  • क्या बच्चों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण में पढ़ने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए?
  • शहर के प्रमुख सरकारी विद्यालय में कमरों और मूलभूत सुविधाओं की कमी के लिए जिम्मेदार कौन है?
  • शिकायत के बाद क्या प्रशासन और शिक्षा विभाग कोई ठोस कार्रवाई करेंगे?
  • बच्चों को बरामदे से कक्षा तक पहुंचाने के लिए कब तक प्रभावी कदम उठाए जाएंगे?

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

राजनांदगांव के इस सरकारी विद्यालय की तस्वीरें केवल एक स्कूल की समस्या नहीं दर्शातीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करती हैं। अब अभिभावकों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों की नजर प्रशासन तथा शिक्षा विभाग पर है कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए कितनी जल्दी और कितनी गंभीर पहल की जाती है।

सन्सनी टाइम्स इस मामले में प्रशासन द्वारा की जाने वाली आगामी कार्रवाई और विद्यालय की व्यवस्थाओं में होने वाले सुधार पर लगातार नजर बनाए रखेगा।

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