पाइप से भरते रहे टैंकर, मीटर का नहीं मिला अता-पता! ड्यूटी के दौरान धूम्रपान करते दिखे पंप ऑपरेटर, महमरा इंटकवेल पर उठे बड़े सवाल

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Sansani Times Exclusive

दुर्ग | विशेष रिपोर्ट | Sansani Times Desk

दुर्ग जिले में शिवनाथ नदी के महमरा एनीकट स्थित सीएसआईडीसी (CHIDC/CSIDC) इंटकवेल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। औद्योगिक इकाइयों को जल आपूर्ति की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब एक नया वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है। वीडियो में पंप हाउस में पदस्थ एक पंप ऑपरेटर कथित तौर पर ड्यूटी के दौरान धूम्रपान करते दिखाई दे रहे हैं, जबकि उसी समय टैंकरों में पानी भरने का कार्य जारी था।

मौके पर क्या मिला?

जानकारी के अनुसार, सिलोदा स्थित पंप हाउस का निरीक्षण करने पहुंची एक मीडिया टीम ने देखा कि जीआई पाइप के माध्यम से सीधे टैंकरों में पानी भरा जा रहा था। निरीक्षण के दौरान जिस पाइप लाइन से पानी की आपूर्ति की जा रही थी, वहां किसी प्रकार का फ्लो मीटर दिखाई नहीं देने का दावा किया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी औद्योगिक जल आपूर्ति प्रणाली में फ्लो मीटर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके माध्यम से पानी की वास्तविक खपत दर्ज की जाती है, जिसके आधार पर बिलिंग और राजस्व निर्धारण किया जाता है। ऐसे में मौके पर फ्लो मीटर नहीं दिखाई देने से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


ड्यूटी के दौरान धूम्रपान का वीडियो वायरल

मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब सामने आए वीडियो में पंप ऑपरेटर प्रमोद बांधे कथित रूप से ड्यूटी के दौरान धूम्रपान करते दिखाई दे रहे हैं। सरकारी कार्यस्थलों पर अनुशासन और सेवा नियमों के पालन को लेकर पहले से निर्धारित दिशानिर्देश मौजूद हैं। ऐसे में ड्यूटी समय में धूम्रपान का दृश्य प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

मीडिया टीम द्वारा जब उनसे जल आपूर्ति व्यवस्था, मीटरिंग प्रणाली और रिकॉर्ड संबंधी जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने कथित तौर पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने वीडियो रिकॉर्डिंग पर भी आपत्ति जताई।


सात महीने से टैंकरों से जल आपूर्ति का आरोप

स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पिछले लगभग सात महीनों से निजी उद्योगों को टैंकरों के माध्यम से बड़ी मात्रा में पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि जल आबंटन, अनुबंध, मीटरिंग और बिलिंग प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है, तो इससे शासन को राजस्व हानि होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।


नियम क्या कहते हैं?

जल संसाधन प्रबंधन से जुड़े प्रावधानों के अनुसार औद्योगिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले पानी का रिकॉर्ड रखना, खपत की माप करना तथा निर्धारित शुल्क वसूलना अनिवार्य प्रक्रिया मानी जाती है। मीटरिंग व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना और राजस्व की सटीक गणना सुनिश्चित करना होता है।

ऐसे में बिना स्पष्ट मीटरिंग व्यवस्था दिखाई दिए टैंकरों में पानी भरने की प्रक्रिया कई सवाल खड़े कर रही है।


उठ रहे हैं ये बड़े सवाल

  • टैंकरों में भरे जा रहे पानी की वास्तविक मात्रा कैसे मापी जा रही है?
  • यदि फ्लो मीटर मौजूद है, तो वह मौके पर दिखाई क्यों नहीं दिया?
  • उद्योगों को जल आपूर्ति का रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार किया जा रहा है?
  • बिलिंग और राजस्व निर्धारण की प्रक्रिया क्या है?
  • क्या संबंधित विभाग के पास प्रत्येक टैंकर आपूर्ति का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है?
  • यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप है, तो रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?

जांच की मांग तेज

स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने जल आपूर्ति रिकॉर्ड, मीटरिंग व्यवस्था, बिलिंग दस्तावेजों और वीडियो में दिखाई दे रहे तथ्यों की विभागीय जांच कराने की मांग उठाई है।

लोगों का कहना है कि सरकारी संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका को दूर किया जा सके।


विभाग का पक्ष आना बाकी

इस मामले में संबंधित विभाग या अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विभाग अपनी स्थिति स्पष्ट करता है, तो Sansani Times उसका पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।


Sansani Times इस मामले से जुड़े हर पहलू पर नजर बनाए हुए है। जांच और विभागीय प्रतिक्रिया सामने आने के बाद आगे की जानकारी भी पाठकों तक पहुंचाई जाएगी।

(नोट: समाचार में उल्लिखित कुछ आरोप स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों या विभागीय जांच के बाद ही संभव होगी।)

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