धरती माता बचाओ, खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को किया गया जागरूक

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जैविक खेती, जल संरक्षण और डीएसआर तकनीक अपनाने पर दिया गया जोर

रिपोर्ट : Sansani Times | राजनांदगांव

राजनांदगांव। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशन में संचालित “धरती माता बचाओ, खेत बचाओ” अभियान के अंतर्गत जिले के छुरिया विकासखंड के ग्राम कुमरदा में किसानों एवं महिलाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक एवं जैविक खेती की नवीन तकनीकों से अवगत कराना तथा भूमि की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को खेती की उन्नत तकनीकों, जैविक कृषि पद्धतियों, जल संरक्षण तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ऐसे में जैविक खेती अपनाकर भूमि की उत्पादकता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।

डीएसआर तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन, घटेगी लागत

कार्यक्रम के दौरान किसानों को डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से धान की सीधी बुवाई की जाती है, जिससे पानी की बचत होती है और मजदूरी लागत में भी कमी आती है। साथ ही फसल उत्पादन में वृद्धि होने की संभावना रहती है।

विशेषज्ञों ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य और घटते जलस्तर को देखते हुए डीएसआर तकनीक किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन सकती है। इसके माध्यम से खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है।

जैविक खेती अपनाने की दी सलाह

कृषि विस्तार अधिकारी सुदेश पटेल ने किसानों को संबोधित करते हुए जैविक खेती के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम होती जा रही है। किसानों को धीरे-धीरे जैविक विकल्पों की ओर बढ़ना चाहिए ताकि भूमि की गुणवत्ता सुरक्षित रह सके और उत्पादन भी बेहतर हो।

उन्होंने किसानों को डायरेक्ट सीड ड्रिलिंग तकनीक, नील-हरित खाद निर्माण तथा हरी खाद के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हरी खाद और जैविक संसाधनों के प्रयोग से नाइट्रोजन की बचत होती है तथा मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है, जिससे भूमि अधिक उपजाऊ बनती है।

जैविक कीटनाशक बनाने की विधि बताई गई

कार्यक्रम में किसानों को घर पर ही जैविक कीटनाशक तैयार करने की विधि भी सिखाई गई। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि जैविक कीटनाशक तैयार करने के लिए 10 लीटर गोमूत्र, 1 किलोग्राम लहसुन, 1 किलोग्राम सीताफल की पत्तियां, 1 किलोग्राम करंज की पत्तियां तथा 1 किलोग्राम नीम की पत्तियों का उपयोग किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यह जैविक कीटनाशक फसलों को कीटों से सुरक्षित रखने के साथ-साथ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित है। इससे किसानों की रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी और उत्पादन लागत में भी कमी आएगी।

महिलाओं की सहभागिता भी रही उल्लेखनीय

जागरूकता कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला कृषकों ने भी भाग लिया। कृषि विभाग द्वारा महिलाओं को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और जैविक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी कृषि विकास को नई दिशा दे सकती है।

अधिकारियों और किसानों की रही उपस्थिति

इस अवसर पर एडीओ गौरीशंकर, आरईओ नितिन श्रीवास, श्रीमती शारदा जांबंधु, कृषि सखी, पशु सखी सहित बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने अभियान को किसानों के हित में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए इसे गांव-गांव तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

धरती और खेतों की सुरक्षा का संदेश

कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को यह संदेश दिया गया कि भूमि, जल और पर्यावरण का संरक्षण ही भविष्य की कृषि को सुरक्षित बना सकता है। जैविक खेती, जल संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपजाऊ धरती छोड़ सकते हैं।

Sansani Times News Desk
राजनांदगांव, छत्तीसगढ़

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