राजनांदगांव/घुमका से बड़ी खबर
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेशभर में आयोजित किए जा रहे “सुशासन तिहार” कार्यक्रम का उद्देश्य गांव-गांव पहुंचकर आम जनता की समस्याओं का निराकरण करना और पारदर्शी प्रशासन की छवि को मजबूत करना है। लेकिन राजनांदगांव जिले के घुमका क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कलेवा में आयोजित सुशासन तिहार शिविर अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है। कार्यक्रम में कथित रूप से अवैध बिजली कनेक्शन के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कार्यक्रम स्थल पर डायरेक्ट लाइन से बिजली सप्लाई का आरोप
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कलेवा में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में मंच, कूलर, पंखे, साउंड सिस्टम और अन्य विद्युत उपकरणों के संचालन के लिए बिजली की विशेष व्यवस्था की गई थी। आरोप है कि कार्यक्रम स्थल के पीछे लगे बिजली खंभे से सीधे तार जोड़कर डायरेक्ट कनेक्शन लिया गया था। इसी अवैध कनेक्शन के जरिए पूरे कार्यक्रम में बिजली सप्लाई की जा रही थी।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बिजली का यह कनेक्शन खुलेआम लगाया गया था और कार्यक्रम स्थल के आसपास मौजूद लोगों को यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। इसके बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर आपत्ति नहीं जताई।
अधिकारियों की मौजूदगी में चलता रहा कार्यक्रम
सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि कार्यक्रम में उप प्रभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम), जनपद पंचायत सीईओ, बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता (जेई) सहित कई विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे, लेकिन कथित बिजली चोरी पर किसी का ध्यान नहीं गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि आम नागरिक इस प्रकार डायरेक्ट लाइन से बिजली उपयोग करते पकड़े जाते हैं तो तत्काल कार्रवाई की जाती है, जुर्माना लगाया जाता है और कई मामलों में एफआईआर तक दर्ज होती है। ऐसे में सरकारी कार्यक्रम में ही नियमों की अनदेखी होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
सरपंच ने साधी चुप्पी
मामले को लेकर जब ग्राम पंचायत कलेवा के सरपंच लुमेश गन्धर्व से सवाल किया गया तो वे स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने मामले पर सीधी प्रतिक्रिया देने के बजाय जिम्मेदारी से दूरी बनाते हुए बात को टालने की कोशिश की।
बिजली विभाग ने जांच की कही बात
वहीं विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता (जेई) पुरन लाल कंवर ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर बताते हुए जांच और नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है। उनका कहना है कि यदि बिना अनुमति डायरेक्ट लाइन से बिजली का उपयोग किया गया है तो यह विद्युत नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सुशासन तिहार की व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सुशासन तिहार की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। जिस मंच से शासन जनता को नियम, पारदर्शिता और जवाबदेही का संदेश दे रहा था, उसी मंच पर कथित रूप से नियमों की अनदेखी होना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि शासन को इस मामले में निष्पक्ष जांच करानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कार्यक्रम के लिए बिजली व्यवस्था किसके निर्देश पर की गई थी और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले को लेकर प्रशासन और बिजली विभाग की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी कार्यक्रमों में व्यवस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़ा मुद्दा बन सकता है।
Sansani Times इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ी हर अपडेट सबसे पहले आप तक पहुंचाई जाएगी।




🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
📍 पता: राजीव नगर, वार्ड नं. 42, बसंतपुर, राजनांदगांव, Chhattisgarh – 491441
📞 मोबाइल: 9406138940
📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
✨ पहचान — बेबाक, तेज़ और सच को जनता तक पहुँचाने वाली पत्रकारिता।



