जांच में दोष सिद्ध होने के बाद भी ‘हैवान’ प्रधानपाठक पर शिक्षा विभाग की मेहरबानी, आखिर क्यों?

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SANSANI TIMES | बलरामपुर-रामानुजगंज | विशेष रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां विकासखंड कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत नवाडीह कला (बरवाही पारा) स्थित प्राथमिक शाला में पदस्थ प्रधानपाठक अशोक कुमार गुप्ता पर मासूम बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार, शारीरिक प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिक्षा विभाग की दो-दो जांचों में आरोप सही पाए जाने के बावजूद अब तक आरोपी प्रधानपाठक पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। अब परिजन और ग्रामीण जिला कलेक्टर की चौखट तक पहुंच चुके हैं और तत्काल निलंबन व आपराधिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


क्या है पूरा मामला?

शिकायती दस्तावेजों के अनुसार, प्राथमिक शाला नवाडीह कला में पदस्थ प्रधानपाठक अशोक कुमार गुप्ता लंबे समय से बच्चों के साथ क्रूर और अपमानजनक व्यवहार करते रहे हैं।

हालिया मामले में पीड़ित छात्रा आरोही गुप्ता के दादा दशरथ प्रसाद गुप्ता ने लिखित शिकायत दर्ज कराई कि स्कूल में प्यास लगने पर बच्ची बोतल से पानी पी रही थी। इसी दौरान थोड़ा पानी गिर गया, जिस पर प्रधानपाठक ने गुस्से में बच्ची के सिर पर पूरी बोतल का पानी उड़ेल दिया और उसे अपमानित करते हुए घर भेज दिया।

दोपहर में बच्ची रोते-बिलखते घर पहुंची, जिसके बाद परिजनों ने स्कूल पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।


जांच में खुले अमानवीयता के राज

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग की टीम ने 27 मार्च 2026 को जांच की। इस दौरान ग्रामीणों ने एक विस्तृत पंचनामा प्रस्तुत किया, जिसमें प्रधानपाठक की कई चौंकाने वाली करतूतों का उल्लेख किया गया।

ग्रामीणों और छात्रों के अनुसार—

  • छात्र नितेश पैंकरा को सजा के तौर पर पेशाब लगी थाली (प्लेट) में जबरन खाना खिलाया गया।
  • छात्र राजधन को जूते पहने हुए लात मारकर पीटा गया।
  • छात्राओं के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग, गाली-गलौज और मारपीट आम बात बन चुकी थी।
  • बच्चों को सार्वजनिक रूप से अपमानित कर मानसिक प्रताड़ना दी जाती थी।

इन आरोपों ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया है।


BEO जांच में भी आरोप सही

ग्रामीणों का कहना है कि 10 अप्रैल 2026 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) मनोज गुप्ता स्वयं मौके पर पहुंचे और मामले की जांच की। जांच में आरोपों की पुष्टि हुई।

इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने भी फोन पर चर्चा के दौरान आरोपी प्रधानपाठक के तत्काल निलंबन का आश्वासन दिया था।

लेकिन कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी आरोपी शिक्षक आज भी अपने पद पर बना हुआ है और स्कूल संचालन कर रहा है।

यही बात अब ग्रामीणों के गुस्से की सबसे बड़ी वजह बन गई है।


“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” सिर्फ नारा?

एक तरफ सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “सुरक्षित बचपन” जैसे बड़े अभियान चलाती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामलों में कार्रवाई का अभाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट में दोष सिद्ध हो चुका है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

क्या शिक्षा विभाग किसी दबाव में काम कर रहा है?

क्या आरोपी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?

क्या बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण किसी व्यक्ति की पहुंच और प्रभाव है?

ये सवाल अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन चुके हैं।


इस मामले में अब तक पुलिस केस क्यों नहीं?

परिजनों और छात्रों के आरोपों के आधार पर यह मामला केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्पष्ट रूप से आपराधिक मामला बनता है।

विशेषज्ञों के अनुसार निम्न धाराओं में FIR दर्ज हो सकती है—

किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act), 2015 — धारा 75

यदि कोई व्यक्ति, जिसके संरक्षण में बच्चा है, उसे मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता है, तो यह गंभीर दंडनीय अपराध है।

भारतीय दंड संहिता (IPC)

  • धारा 323 — मारपीट
  • धारा 504 — जानबूझकर अपमानित करना
  • धारा 506 — धमकी देना

SC/ST एक्ट

यदि पीड़ित बच्चों में आरक्षित वर्ग के छात्र शामिल हैं और उनके साथ जातिगत भेदभाव या अपमान हुआ है, तो कठोर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।


चांदो थाना में शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं

पीड़ित छात्रा के परिजनों ने घटना के तुरंत बाद चांदो थाना में लिखित शिकायत भी दी थी, लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी कोई पुलिस कार्रवाई नहीं हुई।

न FIR, न पूछताछ, न गिरफ्तारी।

यह प्रशासनिक चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

आखिर क्यों आरोपी पर कार्रवाई नहीं हो रही?


भाजपा नेता ने लगाया राजनीतिक संरक्षण का आरोप

पूर्व भाजयुमो मंडल अध्यक्ष एवं जिला भाजपा ओबीसी मोर्चा के सोशल मीडिया प्रभारी संतोष गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा—

“जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा स्वयं कहा गया कि राजनीतिक संरक्षण के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है। अधिकारियों पर दबाव है। यह मामला बेहद गंभीर है और दोषी पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

वहीं छात्रों के अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षक अशोक गुप्ता की पहुंच ऊपर तक है, इसी वजह से अधिकारी कार्रवाई करने से डर रहे हैं।


अब कलेक्टर से न्याय की उम्मीद

मामला अब जिला कलेक्टर तक पहुंच चुका है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने मांग की है कि—

  • आरोपी प्रधानपाठक को तत्काल निलंबित किया जाए
  • सेवा से बर्खास्त किया जाए
  • चांदो थाना में तत्काल FIR दर्ज कराई जाए
  • बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
  • शिक्षा विभाग की भूमिका की भी जांच हो

ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।

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निष्कर्ष

स्कूल बच्चों के भविष्य निर्माण का स्थान होता है, भय और अपमान का नहीं।

यदि जांच में दोष सिद्ध होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह केवल एक शिक्षक की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन बच्चों के न्याय के लिए आगे आता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।

SANSANI TIMES इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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