जामड़ी पाटेश्वर धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शांतिपूर्ण संपन्न हुई देव यात्रा

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हजारों श्रद्धालुओं ने किए देव दर्शन, प्रशासन और समाज के समन्वय से सफल रहा आयोजन

बालोद। डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम तुएगोंदी स्थित प्रसिद्ध जामड़ी पाटेश्वर धाम में आयोजित सर्व आदिवासी समाज की पारंपरिक देव यात्रा इस वर्ष आस्था, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आई। लंबे समय से विवादों और चर्चाओं के केंद्र में रहे इस धार्मिक स्थल पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का नया माहौल बना दिया। दूर-दराज के गांवों और जिलों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने देव दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।

संवेदनशील माहौल के बीच था आयोजन

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से जामड़ी पाटेश्वर धाम भूमि विवाद, वन क्षेत्र में निर्माण कार्यों को लेकर उठे सवालों तथा विभिन्न संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के कारण लगातार चर्चा में रहा है। सर्व आदिवासी समाज द्वारा अपने पारंपरिक धार्मिक स्थल की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर कई बार प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया था। इसी वजह से इस वर्ष आयोजित देव यात्रा को प्रशासन ने संवेदनशील श्रेणी में रखा था।

प्रशासन रहा पूरी तरह सतर्क

देव यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और वन विभाग ने संयुक्त रूप से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। आयोजन स्थल, मुख्य मार्गों और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी करती रहीं। अधिकारियों ने समय-समय पर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और यह सुनिश्चित किया कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। प्रशासन की सतर्कता के चलते कार्यक्रम के दौरान कहीं भी किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।

समाज और प्रशासन के बीच बनी सहमति

आयोजन से पहले सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कई दौर की चर्चा और बैठकें आयोजित की गई थीं। इन बैठकों में धार्मिक परंपराओं और सामाजिक भावनाओं का सम्मान करते हुए कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने पर सहमति बनी थी।

इसी समन्वय का परिणाम रहा कि पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने अनुशासन और मर्यादा का परिचय दिया तथा सभी धार्मिक अनुष्ठान परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुए।

मीडिया प्रवेश पर लगी सीमित रोक

सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा मीडिया कर्मियों की आवाजाही पर कुछ प्रतिबंध भी लगाए गए थे। कई पत्रकारों ने आयोजन स्थल तक पहुंच नहीं मिलने पर असंतोष व्यक्त किया। उनका कहना था कि समाचार कवरेज के लिए स्थल तक पहुंच आवश्यक थी, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उन्हें निर्धारित सीमा से आगे नहीं जाने दिया गया।

हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित विवाद की स्थिति से बचने के लिए लिया गया था।

आस्था और परंपरा का बना केंद्र

जामड़ी पाटेश्वर धाम लंबे समय से आदिवासी समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। देव यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने पारंपरिक पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

श्रद्धालुओं का कहना था कि जामड़ी पाटेश्वर धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और पहचान का प्रतीक है। इसलिए इसकी सुरक्षा और संरक्षण समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

शांतिपूर्ण समापन से मिली राहत

तमाम विवादों, चर्चाओं और प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद जामड़ी पाटेश्वर धाम की देव यात्रा का शांतिपूर्ण समापन क्षेत्र के लिए राहत और संतोष का विषय रहा। प्रशासन, समाज और श्रद्धालुओं के सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसने यह संदेश दिया कि संवाद, सहयोग और परस्पर सम्मान के माध्यम से किसी भी संवेदनशील स्थिति का समाधान संभव है।

Sansani Times Desk

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