सुशासन तिहार में बिजली चोरी का बड़ा खेल! सरकारी शिविर में हुकिंग से जल रही थीं लाइटें, शिकायत के बाद पहुंची टीम, सांसद के बयान से मचा बवाल

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गोबरा नवापारा में सुशासन के मंच पर उठे बड़े सवाल, बिजली विभाग की जांच के बाद गरमाई सियासत

गोबरा नवापारा। प्रदेशभर में सुशासन और पारदर्शिता का संदेश देने के लिए आयोजित किए जा रहे “सुशासन तिहार” कार्यक्रम की गोबरा नवापारा में उस समय किरकिरी हो गई जब सरकारी शिविर में कथित रूप से बिजली चोरी का मामला सामने आया। आरोप है कि जिस मंच से कानून के पालन और जवाबदेही की बातें की जा रही थीं, उसी मंच की रोशनी अवैध हुकिंग और सीधे विद्युत लाइन से लिए गए कनेक्शन के सहारे चल रही थी।

मामले के सामने आते ही स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। शिकायत मिलने के बाद बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। वहीं इस पूरे मामले पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का बयान सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है।

मुख्य लाइन से सीधे जोड़े गए तार, कई जगह मिले ज्वाइंट

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय नागरिकों के अनुसार शिविर स्थल पर नियमित विद्युत कनेक्शन की बजाय मुख्य लाइन से सीधे तार जोड़कर बिजली सप्लाई की जा रही थी। आयोजन स्थल के आसपास कई स्थानों पर तारों में अस्थायी ज्वाइंट दिखाई दिए, जिनके जरिए पूरे शिविर को बिजली उपलब्ध कराई जा रही थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आम नागरिक यदि इस तरह बिजली का उपयोग करें तो उन पर तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन सरकारी कार्यक्रम में नियमों की अनदेखी आखिर किस आधार पर की गई?

शिकायत के बाद हरकत में आया बिजली विभाग

मामले की शिकायत मिलते ही विद्युत विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे स्थल का निरीक्षण किया। सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक जांच में अनधिकृत विद्युत उपयोग से जुड़े तथ्य सामने आए हैं। विभागीय अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट तैयार कर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है।

हालांकि अब तक विभाग की ओर से अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

सांसद और अधिकारियों की मौजूदगी में चलता रहा कथित अवैध कनेक्शन

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस शिविर में सांसद, स्थानीय विधायक और कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे, वहां यदि अवैध विद्युत कनेक्शन चल रहा था तो किसी की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी?

हजारों लोगों की मौजूदगी वाले इस आयोजन में कथित रूप से खुलेआम चल रही इस व्यवस्था ने प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

सांसद के बयान ने बढ़ाई सियासी गर्मी

जब इस मामले को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि—

“सरकारी कार्यक्रम में सरकारी साधनों का उपयोग गलत नहीं है।”

सांसद के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि सरकारी संसाधनों के उपयोग और बिजली चोरी के आरोप दो अलग-अलग मुद्दे हैं। यदि बिजली उपयोग पूरी तरह वैध था तो उसका अधिकृत रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

हादसे का भी था बड़ा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार मुख्य लाइन में बिना अनुमति तार जोड़ना केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि गंभीर सुरक्षा जोखिम भी है। खुले तार, अस्थायी जोड़ और असुरक्षित विद्युत व्यवस्था किसी भी समय शॉर्ट सर्किट, आग लगने या करंट फैलने जैसी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

यदि आयोजन के दौरान कोई बड़ा हादसा हो जाता तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती? यह सवाल अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

सुशासन के दावों पर उठे सवाल

जिस कार्यक्रम का उद्देश्य जनता को सुशासन और पारदर्शिता का संदेश देना था, उसी कार्यक्रम में नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आने से सरकार और प्रशासन दोनों की साख पर सवाल उठ रहे हैं।

अब लोगों की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि बिजली चोरी या अनधिकृत विद्युत उपयोग की पुष्टि होती है तो क्या जिम्मेदार लोगों पर वही कार्रवाई होगी जो आम उपभोक्ताओं के खिलाफ की जाती है, या फिर मामला सरकारी कार्यक्रम का हवाला देकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

बड़ा सवाल

गोबरा नवापारा का यह मामला अब केवल कथित बिजली चोरी का नहीं रह गया है। यह मामला सुशासन के दावों, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के समान अनुपालन की परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और प्रशासन की कार्रवाई ही तय करेगी कि इस मामले में सच सामने आता है या नहीं।

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