क्या कानून सबके लिए समान है या कुछ खास लोगों के लिए?

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बालोद | SANSANI TIMES

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पुलिस प्रशासन और डौंडीलोहारा थाना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आम जनता के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कानून वास्तव में सबके लिए समान है, या फिर प्रभावशाली लोगों के लिए इसकी परिभाषा अलग हो जाती है।

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मामला तब और गंभीर हो गया जब भाजपा के एक सक्रिय आदिवासी नेता को फोन पर अश्लील गालियां दी गईं। पीड़ित द्वारा थाना, आजाक थाना सहित संबंधित बड़े विभागों में शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। इससे प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

वहीं दूसरी ओर, एक विद्युत अधिकारी से 17 लाख रुपये के बिजली बिल की जानकारी लेने के लिए फोन किया गया। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने बताया कि मनीराम नामक व्यक्ति उससे 7 लाख रुपये रिश्वत की मांग कर रहा है। जब इस कथित भ्रष्टाचार की सच्चाई उजागर करने की कोशिश की गई, तब खबर फास्ट के वरिष्ठ संवाददाता—जिनका उस खबर के प्रकाशन से कोई सीधा संबंध नहीं था—और एक युवा किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ता पर झूठा मामला दर्ज करा दिया गया।

आरोप यह भी है कि मामले को और गंभीर बनाने के लिए जातिगत गालियां, फिरौती और अन्य गंभीर धाराएं जोड़ दी गईं, और बेहद तेजी से एफआईआर दर्ज कर ली गई। इस त्वरित कार्रवाई ने लोगों के मन में यह सवाल और गहरा कर दिया है कि क्या न्याय व्यवस्था समान रूप से काम कर रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति सच्चाई सामने लाने की कोशिश करता है, तो उसे ही आरोपी बना दिया जाता है। झूठे प्रकरणों के माध्यम से किसी परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक शांति को प्रभावित करना क्या न्याय व्यवस्था का हिस्सा होना चाहिए?

यह केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। यदि कानून का दुरुपयोग इसी तरह जारी रहा, तो आम जनता का विश्वास प्रशासन और न्याय व्यवस्था से पूरी तरह समाप्त हो सकता है।

कानून का उद्देश्य भय पैदा करना नहीं, बल्कि न्याय स्थापित करना होना चाहिए। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाते हैं या नहीं।

SANSANI TIMES इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है।

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